प्रधानमंत्री
ग्रामीण आवास
योजना (PMAY-G)
गाँव में रहने वाले उन परिवारों के लिए जिनके पास अपना पक्का घर नहीं है। सरकार ₹1.20 लाख से लेकर ₹1.30 लाख तक की मदद देती है ताकि हर परिवार की छत का सपना पूरा हो सके।
📊 योजना की एक झलक
पक्का मकान मिलेगा
25 वर्ग मीटर का पक्का घर जिसमें अलग से रसोई बनाने की पूरी जगह होती है
पैसा सीधे खाते में
बिचौलियों का कोई चक्कर नहीं। पैसा DBT के ज़रिए सीधे आपके बैंक अकाउंट में पहुँचता है
शौचालय का पैसा अलग
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनवाने के लिए ₹12,000 की अतिरिक्त राशि दी जाती है
गैस, बिजली, पानी मुफ्त
उज्ज्वला, सौभाग्य और जल जीवन मिशन से गैस, बिजली और नल का पानी बिना खर्चे के
PM ग्रामीण आवास योजना क्या है?
भारत के गाँवों में आज भी लाखों परिवार ऐसे हैं जो कच्चे मकानों में रहते हैं। बारिश में छत टपकती है, सर्दियों में ठंडी हवा अंदर आती है, और गर्मियों में घर भट्ठी बन जाता है। ऐसे परिवारों को एक मज़बूत छत देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) शुरू की।
ये योजना असल में कोई नई स्कीम नहीं है। पहले इसे इंदिरा आवास योजना (IAY) कहते थे जो 1985 से चल रही थी। लेकिन उस योजना में कई खामियाँ थीं। लाभार्थियों के चुनाव में भेदभाव होता था, पैसा बीच में रुक जाता था, और मकान की क्वालिटी की कोई जवाबदेही नहीं थी। इन सब समस्याओं को ठीक करने के लिए 20 नवंबर 2016 को IAY को बदलकर PMAY-G बनाया गया।
इस योजना का सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि इसमें लाभार्थी का चुनाव SECC 2011 (सामाजिक आर्थिक और जातिगत जनगणना) के डेटा से होता है। इसका मतलब ये कि कोई नेता या अधिकारी मनमर्ज़ी से किसी का नाम नहीं डाल सकता। जिस परिवार को सच में ज़रूरत है, उसी को मकान मिलता है।
सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के तहत 2.95 करोड़ पक्के मकान बनाए जाएँ। इनमें से बहुत सारे मकान बन भी चुके हैं, लेकिन अभी भी कई परिवार ऐसे हैं जिनको इसका फ़ायदा मिलना बाकी है।
✨ इस योजना की खास बातें
- ✓ कम से कम 25 वर्ग मीटर का पक्का मकान जिसमें रसोई अलग हो
- ✓ मैदानी इलाकों में ₹1.20 लाख और पहाड़ी इलाकों में ₹1.30 लाख की सहायता
- ✓ मनरेगा के तहत 90 से 95 दिन की मज़दूरी अलग से मिलती है
- ✓ शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 स्वच्छ भारत मिशन से
- ✓ लाभार्थी खुद अपनी पसंद का घर का डिज़ाइन चुन सकता है
- ✓ पैसा आधार से लिंक्ड बैंक अकाउंट में DBT से आता है
- ✓ निर्माण के हर चरण की जियो टैग्ड फोटो ली जाती है ताकि कोई गड़बड़ न हो
- ✓ घर महिला के नाम पर या पति पत्नी के संयुक्त नाम पर बनता है
इंदिरा आवास योजना और PMAY-G में क्या बदला?
बहुत से लोग पूछते हैं कि पुरानी इंदिरा आवास योजना और नई PMAY-G में आखिर फ़र्क क्या है। तो चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
इंदिरा आवास योजना में लाभार्थी का चुनाव BPL लिस्ट से होता था। और BPL लिस्ट बनाने में काफ़ी गड़बड़ियाँ होती थीं। कई बार ज़रूरतमंद लोगों का नाम लिस्ट में होता ही नहीं था, और कई बार ऐसे लोग शामिल हो जाते थे जिनकी हालत इतनी खराब नहीं थी। PMAY-G में ये सब बदल गया। अब SECC 2011 का डेटा इस्तेमाल होता है जो पूरे देश में एक जैसे मानकों पर बना है।
दूसरा बड़ा बदलाव पैसों में आया। पहले मैदानी इलाकों में सिर्फ़ ₹70,000 मिलते थे जो मकान बनाने के लिए काफ़ी नहीं थे। अब ये राशि बढ़ाकर ₹1,20,000 कर दी गई है। पहाड़ी इलाकों में ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1,30,000 किया गया।
तीसरा अहम बदलाव ये है कि अब मकान का साइज़ भी तय है। पहले कोई न्यूनतम साइज़ नहीं था, इसलिए बहुत छोटे और कमज़ोर मकान बन जाते थे। अब हर मकान का एरिया कम से कम 25 वर्ग मीटर होना ज़रूरी है और उसमें रसोई की जगह अलग से होनी चाहिए।
चौथी बात जो सबसे ज़्यादा कारगर साबित हुई वो है जियो टैगिंग। अब मकान निर्माण के हर स्टेज पर जियो टैग्ड फोटो खींची जाती है और सरकारी पोर्टल पर अपलोड होती है। इससे ये पता चलता रहता है कि काम सही हो रहा है या नहीं। भ्रष्टाचार पर काफ़ी रोक लगी है इससे।
केंद्र और राज्य सरकार का खर्चा कैसे बँटता है?
PMAY-G का पूरा खर्चा अकेले केंद्र सरकार नहीं उठाती। इसमें राज्य सरकार भी अपना हिस्सा देती है।
मैदानी इलाकों के लिए खर्चे का बँटवारा 60:40 के अनुपात में होता है। मतलब 60 प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार देती है और 40 प्रतिशत राज्य सरकार लगाती है।
पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी इलाकों और केंद्र शासित प्रदेशों में ये अनुपात 90:10 का है। यानी 90 प्रतिशत केंद्र देता है और सिर्फ़ 10 प्रतिशत राज्य को लगाना होता है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इन इलाकों में निर्माण की लागत ज़्यादा आती है और राज्यों के पास भी सीमित बजट होता है।
जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सभी पूर्वोत्तर राज्य इस 90:10 कैटेगरी में आते हैं। इसके अलावा जो इलाके LWE (Left Wing Extremism) प्रभावित हैं वहाँ भी ये ऊँचा अनुपात लागू होता है।
मकान की क्वालिटी कैसी होती है?
बहुत लोगों के मन में ये सवाल होता है कि सरकारी मकान की क्वालिटी कैसी होगी। तो बता दें कि PMAY-G में मकान की क्वालिटी पर काफ़ी ध्यान दिया जाता है।
सबसे पहले तो मकान का डिज़ाइन सरकार ने पहले से तैयार करवा रखा है। ये डिज़ाइन आपके इलाके की जलवायु, मिट्टी और भूकंप ज़ोन के हिसाब से बने होते हैं। मतलब अगर आप भूकंप प्रभावित क्षेत्र में रहते हैं तो आपका मकान भूकंप झेलने लायक होगा।
लाभार्थी को कई डिज़ाइन दिखाए जाते हैं और वो अपनी पसंद का डिज़ाइन चुन सकता है। कोई एक ही डिज़ाइन थोपा नहीं जाता। हर डिज़ाइन में ये ज़रूरी है कि कम से कम 25 वर्ग मीटर एरिया हो, एक अलग रसोई हो, और हवा रोशनी के लिए खिड़कियाँ हों।
निर्माण के दौरान तीन बार इंस्पेक्शन होता है। पहला नींव रखने के बाद, दूसरा लिंटल लेवल पर, और तीसरा जब मकान पूरा हो जाए। हर बार की फोटो जियो टैग के साथ अपलोड होती है। अगर कहीं क्वालिटी में कमी दिखती है तो अगली किश्त रोक दी जाती है।
पात्रता के नियम आसान भाषा में
ये योजना सबके लिए नहीं है। सरकार ने कुछ शर्तें तय की हैं जिनके आधार पर लाभार्थी चुने जाते हैं। नीचे हमने दोनों तरफ़ से बात रखी है ताकि आपको कोई confusion न रहे।
✅ आपको फ़ायदा मिल सकता है अगर
- आपके पास कोई पक्का मकान नहीं है। कच्चा घर है या एक दो कमरों वाला टूटा फूटा ढाँचा है
- आपके परिवार का नाम SECC 2011 की सूची में दर्ज है
- आप अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक या BPL श्रेणी से हैं
- आप या आपका परिवार मैला ढोने का काम करता है या बंधुआ मज़दूरी से मुक्त हुए हैं
- घर की मुखिया कोई विधवा महिला हैं या परिवार में कोई विकलांग सदस्य है
- परिवार में 16 से 59 साल के बीच का कोई सदस्य नहीं है यानी कमाने वाला कोई नहीं
- परिवार में 25 साल से ऊपर कोई भी पढ़ा लिखा सदस्य नहीं है
- ज़मीन नहीं है और रोज़ाना की दिहाड़ी मज़दूरी से गुज़ारा चलता है
❌ आपको फ़ायदा नहीं मिलेगा अगर
- आपके परिवार के पास पहले से एक पक्का मकान मौजूद है
- घर का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी या सरकारी सेवा में है
- परिवार के किसी सदस्य की मासिक कमाई ₹10,000 से ऊपर है
- आपके पास कोई मोटर वाहन है जैसे कार, जीप या मोटरबोट
- आपके पास ट्रैक्टर या कोई मशीनी खेती का उपकरण है
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) है और उसकी लिमिट ₹50,000 या ज़्यादा है
- पहले इंदिरा आवास योजना या PMAY-G का लाभ ले चुके हैं
- परिवार का कोई सदस्य इनकम टैक्स या प्रोफेशनल टैक्स भरता है
SECC 2011 क्या है और ये इतना ज़रूरी क्यों है?
SECC का पूरा नाम है सामाजिक आर्थिक और जातिगत जनगणना (Socio Economic and Caste Census)। ये 2011 में हुई एक सर्वे थी जिसमें देश के हर ग्रामीण परिवार की आर्थिक हालत का ब्यौरा इकट्ठा किया गया था।
इस सर्वे में देखा गया कि परिवार के पास कितनी ज़मीन है, मकान कैसा है, कमाई का ज़रिया क्या है, परिवार में कोई विकलांग है या नहीं, पढ़ाई लिखाई कितनी हुई है वगैरह। इन सब बातों के आधार पर हर परिवार को एक "वंचना स्कोर" दिया गया।
PMAY-G में लाभार्थी का चुनाव इसी SECC डेटा से होता है। जिन परिवारों का वंचना स्कोर सबसे ज़्यादा है यानी जो सबसे ज़्यादा ग़रीब और बेसहारा हैं, उनको पहले मकान मिलता है। इससे भाई भतीजावाद और सिफ़ारिश पर रोक लगती है क्योंकि डेटा पहले से तय है और ग्राम सभा के सामने सार्वजनिक रूप से वेरीफाई किया जाता है।
अगर आपको लगता है कि आपका नाम SECC लिस्ट में होना चाहिए लेकिन नहीं है, तो अपनी ग्राम पंचायत या ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) से बात कीजिए। ग्राम सभा के पास अधिकार है कि वो छूटे हुए परिवारों को शामिल करने की सिफ़ारिश कर सकती है।
मकान किसके नाम पर बनता है?
PMAY-G की एक बहुत अच्छी बात ये है कि इसमें मकान का मालिकाना हक़ महिलाओं को दिया जाता है। सरकार चाहती है कि महिलाओं को संपत्ति में बराबर का अधिकार मिले।
नियम के मुताबिक मकान या तो परिवार की महिला सदस्य के नाम पर बनेगा या फिर पति और पत्नी दोनों के संयुक्त नाम पर। सिर्फ़ पुरुष के नाम पर मकान नहीं बनाया जाता।
इसके पीछे सोच ये है कि अक्सर ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के पास अपने नाम पर कोई संपत्ति नहीं होती। अगर पति कुछ कर दे या छोड़कर चला जाए तो महिला बेसहारा हो जाती है। मकान उसके नाम पर होने से उसे एक सुरक्षा मिलती है।
हालाँकि अगर परिवार में कोई योग्य महिला सदस्य नहीं है, जैसे कि अकेला पुरुष है, तो उस स्थिति में पुरुष के नाम पर भी मकान बन सकता है। लेकिन ऐसे केस बहुत कम होते हैं।
सहायता राशि का पूरा हिसाब
बहुत लोगों को लगता है कि सिर्फ़ मकान बनाने का पैसा मिलता है। लेकिन असल में शौचालय, गैस कनेक्शन, बिजली और पानी सब कुछ इसमें शामिल है। पूरा ब्रेकडाउन नीचे दिया गया है।
| क्या मिलता है | मैदानी इलाके | पहाड़ी / पूर्वोत्तर | किस योजना से मिलता है |
|---|---|---|---|
| मकान निर्माण की राशि | ₹1,20,000 | ₹1,30,000 | केंद्र और राज्य (60:40) |
| मनरेगा मज़दूरी | 90 दिन की मज़दूरी | 95 दिन की मज़दूरी | मनरेगा (MGNREGA) |
| शौचालय निर्माण | ₹12,000 | ₹12,000 | स्वच्छ भारत मिशन (SBM) |
| रसोई गैस कनेक्शन | मुफ्त कनेक्शन | मुफ्त कनेक्शन | प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना |
| बिजली कनेक्शन | मुफ्त कनेक्शन | मुफ्त कनेक्शन | सौभाग्य योजना |
| नल से जल कनेक्शन | मुफ्त कनेक्शन | मुफ्त कनेक्शन | जल जीवन मिशन |
कुल मिलाकर कितने का फ़ायदा होता है?
अगर सब कुछ जोड़ें तो एक लाभार्थी को असल में ₹1.20 लाख से बहुत ज़्यादा मिलता है। चलिए मैदानी इलाके का हिसाब लगाते हैं:
- मकान निर्माण: ₹1,20,000
- मनरेगा मज़दूरी (90 दिन × औसतन ₹230 प्रतिदिन): लगभग ₹20,700
- शौचालय: ₹12,000
- गैस कनेक्शन (उज्ज्वला): लगभग ₹1,600 की बचत
- बिजली कनेक्शन (सौभाग्य): लगभग ₹500 की बचत
- पानी कनेक्शन (जल जीवन): मुफ्त
यानी कुल मिलाकर एक परिवार को लगभग ₹1,55,000 से ₹1,65,000 तक का फ़ायदा होता है। और अगर आप पहाड़ी इलाके में हैं तो ये आँकड़ा और भी ज़्यादा होगा।
इसके अलावा अगर कोई लाभार्थी चाहे तो ₹70,000 तक का अतिरिक्त लोन भी ले सकता है बैंक से। ये लोन लेना ज़रूरी नहीं है, पूरी तरह आपकी मर्ज़ी पर है। लेकिन अगर आप थोड़ा बड़ा या बेहतर मकान बनाना चाहते हैं तो ये विकल्प उपलब्ध है।
पैसा कैसे और कब आता है? किश्तों की पूरी जानकारी
PMAY-G में पैसा एक बार में नहीं दिया जाता। ये तीन किश्तों में आता है और हर किश्त निर्माण के एक खास पड़ाव पर मिलती है।
पहली किश्त: मंज़ूरी मिलने के बाद सबसे पहली किश्त आती है। ये राशि नींव रखने और निर्माण शुरू करने के लिए दी जाती है। इस किश्त के लिए बस मंज़ूरी पत्र (Sanction Order) ज़रूरी है।
दूसरी किश्त: जब मकान का निर्माण लिंटल लेवल (यानी दरवाज़ों और खिड़कियों के ऊपर वाला लेवल) तक पहुँच जाए, तब दूसरी किश्त मिलती है। इसके लिए निर्माण की जियो टैग्ड फोटो अपलोड करनी होती है। बिना फोटो के दूसरी किश्त नहीं आती।
तीसरी और आखिरी किश्त: जब मकान पूरी तरह बनकर तैयार हो जाए और शौचालय भी बन जाए, तब आखिरी किश्त दी जाती है। इसमें भी पूरे मकान और शौचालय की जियो टैग्ड फोटो ज़रूरी है।
एक ज़रूरी बात ये है कि मकान का निर्माण मंज़ूरी मिलने के 12 महीने के अंदर पूरा होना चाहिए। अगर किसी वजह से देर हो रही है तो अपने ग्राम पंचायत या BDO से बात करके समय सीमा बढ़वा सकते हैं।
आवेदन कैसे होता है? स्टेप बाय स्टेप समझिए
PMAY-G में आपको खुद ऑनलाइन फॉर्म भरने की ज़रूरत नहीं होती। लाभार्थी का चुनाव सरकार खुद करती है। लेकिन ये जानना ज़रूरी है कि ये प्रक्रिया कैसे चलती है ताकि आप सही वक़्त पर सही कदम उठा सकें।
SECC डेटा से नाम निकलना
सरकार SECC 2011 के डेटा से उन परिवारों की लिस्ट बनाती है जो पात्र हैं
ग्राम सभा में वेरीफिकेशन
ग्राम सभा में लिस्ट सार्वजनिक की जाती है और लोगों से पुष्टि ली जाती है
मंज़ूरी और डिज़ाइन चुनना
मंज़ूरी के बाद आप अपनी पसंद का मकान डिज़ाइन चुनकर निर्माण शुरू करते हैं
तीन किश्तों में पैसा
जैसे जैसे मकान बनता है, तीन किश्तों में पैसा सीधे बैंक खाते में आता है
पूरी प्रक्रिया विस्तार से
स्टेप 1: लिस्ट बनना। सबसे पहले केंद्र सरकार SECC 2011 के डेटा में से उन परिवारों की पहचान करती है जिनके पास पक्का मकान नहीं है और जो अन्य पात्रता शर्तें पूरी करते हैं। ये लिस्ट ज़िला स्तर पर तैयार की जाती है।
स्टेप 2: ग्राम सभा में पड़ताल। ज़िले से आई लिस्ट को ग्राम पंचायत में ग्राम सभा की बैठक में सबके सामने रखा जाता है। गाँव के लोग बताते हैं कि क्या लिस्ट में शामिल व्यक्ति सच में ज़रूरतमंद है या नहीं। अगर किसी का नाम गलती से शामिल है तो उसे हटाया जा सकता है, और अगर कोई छूट गया है तो उसे जोड़ने की सिफ़ारिश की जा सकती है।
स्टेप 3: प्राथमिकता तय करना। सभी पात्र परिवारों में से पहले किसको मकान मिलेगा, ये ज़िला स्तर की कमेटी तय करती है। इसमें सबसे ज़्यादा ज़रूरतमंद परिवारों को पहले रखा जाता है। जैसे कि बेघर परिवार, अकेली विधवा, विकलांग व्यक्ति वाले परिवार इत्यादि।
स्टेप 4: मंज़ूरी मिलना। जब आपकी बारी आती है तो आपको एक Sanction Order दिया जाता है। इसमें लिखा होता है कि आपको कितना पैसा मिलेगा और निर्माण कब तक पूरा करना है। इसके बाद आप सरकार द्वारा दिए गए कई डिज़ाइनों में से अपनी पसंद का डिज़ाइन चुनते हैं।
स्टेप 5: निर्माण और पैसा। अब आप मकान बनाना शुरू करते हैं। पहली किश्त तुरंत मिल जाती है। फिर जब लिंटल लेवल तक काम हो जाए तो जियो टैग्ड फोटो अपलोड करके दूसरी किश्त लेते हैं। और मकान पूरा होने पर तीसरी किश्त। पूरी राशि DBT से सीधे बैंक अकाउंट में आती है।
🔍 अपना स्टेटस ऑनलाइन चेक करें
अगर आपका नाम लिस्ट में है या आपने आवेदन किया है, तो सरकारी वेबसाइट पर जाकर अपना स्टेटस देख सकते हैं। बस अपना रजिस्ट्रेशन नंबर डालिए और सारी जानकारी सामने आ जाएगी। इसके अलावा AwaasApp मोबाइल ऐप भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
pmayg.dord.gov.in पर स्टेटस चेक करें →कौन कौन से कागज़ात चाहिए
वेरीफिकेशन के समय ये दस्तावेज़ माँगे जा सकते हैं। सबकी फोटोकॉपी और ओरिजनल दोनों तैयार रखें ताकि कोई परेशानी न हो।
कागज़ात से जुड़ी ज़रूरी बातें
सबसे ज़रूरी दस्तावेज़ आधार कार्ड है क्योंकि पैसा DBT से आता है और उसके लिए आधार से लिंक्ड बैंक अकाउंट चाहिए। अगर आपका आधार बैंक से लिंक नहीं है तो पहले ये काम करवा लीजिए, वरना किश्त अटक सकती है।
मनरेगा जॉब कार्ड भी ज़रूरी है क्योंकि मज़दूरी के 90 या 95 दिन इसी के तहत मिलते हैं। अगर आपके पास जॉब कार्ड नहीं है तो ग्राम पंचायत से बनवा लीजिए। ये बनाना मुफ्त है और कोई भी ग्रामीण परिवार इसके लिए आवेदन कर सकता है।
ज़मीन के कागज़ात को लेकर एक बात समझ लीजिए। अगर आपके पास अपनी ज़मीन नहीं है तो भी आप PMAY-G के लिए पात्र हो सकते हैं। सरकार ऐसे भूमिहीन परिवारों को सामुदायिक ज़मीन या पंचायत की ज़मीन पर मकान बनाने की अनुमति देती है। इसके लिए ग्राम पंचायत से एक प्रमाण पत्र लेना होता है।
लोगों के मन में अक्सर ये सवाल आते हैं
PMAY ग्रामीण आवास योजना से जुड़े वो सवाल जो लोग सबसे ज़्यादा पूछते हैं। हमने कोशिश की है कि हर सवाल का जवाब पूरी गहराई से दें।
अभी अपनी पात्रता जाँचें
सरकारी पोर्टल पर जाकर देखें कि आपका नाम लाभार्थी सूची में है या नहीं। स्टेटस चेक करना बिल्कुल मुफ्त है।
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